गजल- जिन्होंने उम्र भर रिश्ते निभाने की कसम खाई न जाने क्या हुआ उनको न आने की कसम खाई।। उन्हीं की मद भरी मुस्कान से कुछ पूछ मत लेना, फरेवों ने कभी क्या सच बताने की कसम खाई। जिन्हें कंधे पे बैठाकर कभी चंदा दिखाया था, उन्होंने ही मुझे नीचा दिखाने की कसम खाई। जन्म […]
जिसने त्याग तपस्या छोड़ी, छोड़े सुखद विचार। मानव-जीवन दूषित होता, है वह भ्रष्टाचार।। किया कलंकित कर्म निराला,रिश्वत खा जीवन में।उसका मन कलुषित कहलाता,दोष बढ़े तन-मन में।है ये मानव की अभिलाषा,मिले जगत में प्यार।। मानव… बिना कपट के, बिना द्वेष के,जो नर जीवन जीता।यश उसका अमृत बन जाता,नित्य उसे वह पीता।अच्छे कर्म दिलाता गौरव,मिले उसे सत्कार।। […]
दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन के द्वारा छंद के विद्वान आचार्य अनमोल की छंद विधान पर लिखी हुई पुस्तक “हिंदी छंद मंजूषा” का लोकार्पण हिंदी भवन नई, दिल्ली में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती इंदिरा मोहन ने की। कार्यक्रम में सारस्वत अतिथि के रूप में वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष एवं हिंदी भाषा […]