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गीत-रक्षाबंधन
गजल सत्य की नौका पार लाएगी
गजल- निर्लज्ज राजधानी
गीत- रोते रहना ठीक नहीं
गजल- ना कहीं साहित्य का सम्मान है
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गजल-
आज धोखाधड़ी के जोर बढ़ रहे यारो।
पक्ष ईमान के कमजोर पड़ रहे यारो।।

घूसखोरी हो, मिलाबट हो, या घुटाले हों,
भ्रष्ट-आचरण अब हर ओर बढ़ रहे यारो।

फँसी पड़ी है हर सरकार खुद घुटालों में,
भ्रष्ट गठजोड़ अब जेलों में सड़ रहे यारो।

एक तो चोरी और दूसरा करें सीना जोरी,
चोर कोतवाल पर इल्ज़ाम मढ़ रहे यारो।

कोठियाँ बन रहीं हर तरफ फ़रेवों की,
लेकिन ईमान के घर उजड़ रहे यारो।

आदमी के मन में हैं संसार के मज़हब सारे,
फिर क्यों ख़ुदा के नाम पर लड़ रहे यारो।

कौड़ियाँ व्योम के तारों में जा मिलीं देखो,
रत्न ‘अनमोल’ सब एड़ी रगड़ रहे यारो।
🙏🙏
आचार्य अनमोल
‘देश अब आज़ाद है’ से उद्धृत

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