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गीत- रोते रहना ठीक नहीं
गजल- ना कहीं साहित्य का सम्मान है
गजल- उनको आए इक जमाना हो गया
गजल- वो खा गए मलाई
गजल- पक्ष ईमान के कमजोर पड़ रहे यारो
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अनमोल गीत –

किसी बात के दुख को लेकर,
रोते रहना ठीक नहीं,
सभी तरफ खुशियाँ चाहो तो,
सोते रहना ठीक नहीं।।

जीवन तो चलता रहता है,
इसको खूब सँवारें हम,
भूली-बिसरी बातों को नित,
ढोते रहना ठीक नहीं।।

जीवन है ‘अनमोल’ सभी का,
इस पर हम सब गर्व करें,
अपने जीवन में काँटों को,
बोते रहना ठीक नहीं।।

रहो कहीं भी जाकर जग में,
भारत के गुण को गाओ।
हँसी-खुशी से जीवन जियो,
औरों को भी हर्षाओ।।
अपनी मूल संपदा घर की,
खोते रहना ठीक नहीं।।

🌹🌹🌹
आचार्य अनमोल

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