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गीत- रोते रहना ठीक नहीं
गजल- ना कहीं साहित्य का सम्मान है
गजल- उनको आए इक जमाना हो गया
गजल- वो खा गए मलाई
गजल- पक्ष ईमान के कमजोर पड़ रहे यारो
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गजल-
जिन्होंने उम्र भर रिश्ते निभाने की कसम खाई
न जाने क्या हुआ उनको न आने की कसम खाई।।

उन्हीं की मद भरी मुस्कान से कुछ पूछ मत लेना,
फरेवों ने कभी क्या सच बताने की कसम खाई।

जिन्हें कंधे पे बैठाकर कभी चंदा दिखाया था,
उन्होंने ही मुझे नीचा दिखाने की कसम खाई।

जन्म दिन पर लिया करते करोड़ों की जो सौगातें,
उन्होंने ही कभी रिश्वत न खाने की कसम खाई।

चमकती कोठियाँ कारें सभी जग तंत्र से बोलीं,
हमीं ने टैक्स की चोरी बताने की कसम खाई।

चलो ‘अनमोल’ हम भी देख लें उनके ठिकानों को,
जहाँ काली कमाई को छिपाने की कसम खाई।।
आचार्य अनमोल

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