हिंदी गजल हर आदमी को मूर्ख बनाने लगे हैं लोग। क़ानून का मज़ाक उड़ाने लगे हैं लोग।। सत्कर्म को भूला के अपने ही भाल पर, दुर्भाग्य की लकीर बनाने लगे हैं लोग। भूकम्प पीड़ितों की राहत के नाम पर, जो हक़ मिला छीनकर खाने लगे हैं लोग। छन्दों का ज्ञान और न ही काव्य-कल्पना, क्यूँ […]
गीत- ये झरोखे हैं प्रदूषित ये झरोखे हैं प्रदूषित, विष-हवा नित आ रही। पश्चिमी आवेश वाली, गीत ये सिखला रही।। तिमिर के उजले घरों में, जो मनुज हैं रह रहे। कीट गोमय का बने वे, उच्च शिक्षा कह रहे। योग की आवो-हवा में, भोग वायु जा रही।। ये झरोखे…. मन भ्रमित अति कर दिए हैं, […]
गजल- 💥💥💥 हम बदलने पर लगे हैं फैसला इतिहास का। वे प्रदूषित कर रहे हैं व्याकरण विश्वास का।। तुमने नादिरशाह लाकर, लूट ली शालीनता, हम भुलाने पर तुले है, दंश उस संत्रास का। तुम तभी लाए हलाकू कारनामी काफिले, हम सजाने जब लगे, नक्शा नए आवास का। तुमने देके आग, झुलसाई सुघड़ता फूल की, हम […]
गजल 💥💥💥 लोकचर्चा की अजब तस्वीर देखी क्या कहें। आदमी में राक्षसी तासीर देखी क्या कहें।। आज भी जिन्दा हैं उनके शुभ वचन इतिहास में, न्याय में अन्याय की तहरीर देखी क्या कहें। काटते देखे गए हैं क्रूर हाथों से गले, लाश-ए-इन्सान की प्राचीर देखी क्या कहें। चल पड़ी संवेदना कंधे पे अर्थी लादकर, दाह […]
गजल- कोशिश तो की है हमने, अँधेरा गया नहीं। धोखे का इस जहाँ से, बसेरा गया नहीं।। हर ओर छा रही है, तबाही की दास्तां, क्यों जालिमों को अब तलक, घेरा गया नहीं। फुंकार से ही जब, दहल जाता है वदन, क्यों विषधरों की ओर, सपेरा गया नहीं। जाना है सब जहान की, दौलत को […]
गीत – सकल विश्व खुलकर कहता है, भारत देश महान।। इस धरती पर रामकृष्ण ने, खेली लीला न्यारी। इसी धरा पर ‘जिन’ देवों की, लगती वाणी प्यारी। योग और वेदांत विषय का, दिया सभी को ज्ञान।। सकल… सत्य, अहिंसा, जीने दो का, भाव मुखर बतलाया। इसी धरा पर गुरु नानक ने, कर्मठ ज्ञान सिखाया। कृषक […]