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गीत- रोते रहना ठीक नहीं
गजल- ना कहीं साहित्य का सम्मान है
गजल- उनको आए इक जमाना हो गया
गजल- वो खा गए मलाई
गजल- पक्ष ईमान के कमजोर पड़ रहे यारो
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दिल्ली जैसी नगरी में

संविधान संसद में रोता,
दिल्ली जैसी नगरी में।
अपने आदर्शों को खोता।
दिल्ली जैसी नगरी में।।

भाग्य रोज संसद में बनता,
दिल्ली जैसी नगरी में।
रोती देखी सारी जनता,
दिल्ली जैसी नगरी में।।

स्वारथ में जो बनता घोड़ा,
दिल्ली जैसी नगरी में।
करे काम नर दौड़ा-दौड़ा,
दिल्ली जैसी नगरी में।।

भाग-दोड़ नर करते देखे,
दिल्ली जैसी नगरी में।
दुख के मारे मरतेे देखे,
दिल्ली जैसी नगरी में।।

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