गीत –
सकल विश्व खुलकर कहता है,
भारत देश महान।।
इस धरती पर रामकृष्ण ने,
खेली लीला न्यारी।
इसी धरा पर ‘जिन’ देवों की,
लगती वाणी प्यारी।
योग और वेदांत विषय का,
दिया सभी को ज्ञान।।
सकल…
सत्य, अहिंसा, जीने दो का,
भाव मुखर बतलाया।
इसी धरा पर गुरु नानक ने,
कर्मठ ज्ञान सिखाया।
कृषक यहां का हर्षाता है,
गाकर सुख का गान।।
सकल…
समरसता का भाव ह्रदय में,
मन-खुशियां भर देता।
ज्ञान और विज्ञान क्षेत्र में,
सुयश, मान को लेता।
है अपनत्व इसी वसुधा पर,
रहती मुख-मुस्कान।।
सकल…
– *आचार्य अनमोल*