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भगवान राम के आह्वान का गीत

दूषित और स्वार्थ भरी वर्तमान राजनीति के ऊपर गीत-

🚩🚩🚩🚩🚩🚩

हे राम तुम्हें आना होगा,
भारत देश बचाने को।

आज विषमता फैल रही है,
जातिवाद भड़काने से।
कौरव जन अब निकल रहे हैं,
जयचंदी मयखाने से।
खर-दूषण सब मिल बैठे हैं,
अपनी जीत दिलाने को।।
हे राम…

सत्तर वर्ष लुटा है भारत,
भारत माता रोती है।
आतातायी बढ़े देश में,
मानवता भी सोती है।
पामर जन सब मचल रहे हैं,
सत्ता को हथियाने को।।
हे राम…

सोने की चिड़िया थी भारत,
सकल राष्ट्र बर्बाद किया।
देख देख नित दीन दुखी को,
फटता सबका आज हिया।
जयचंदों के कारण ही हम,
भूल गए सुख गाने को।।
हे राम…

खरदूषण, त्रिशला, बाली ने,
अति आतंक मचाया है।
अपने शासन में इन सब ने,
लूट-लूट धन खाया है।
शूर्पणखा को हँसते देखा,
संसद में अब जाने को।।
हे राम…

भ्रष्ट जनों के मन में फिर से,
धन-लालच भर आया है।
गबन, घोटाले करके अब तक,
बाँट-बाँट धन खाया है।
बहुत जने भूखे देखे हैं,
तरसें दाने-दाने को।।
हे राम…

कंस, दुशासन, की बातों में,
भोली जनता आई है।
इसीलिए भारत माता भी,
मन ही मन घबराई है।
सारे रावण मचल रहे हैं,
भारत-लाज चुराने को।।

हलुआ खाने को मिलकर ही,
गठबंधन को जोड़ा है।
वोट बैंक की खातिर सबने,
समरसता को तोड़ा है।
मचल रहे ‘अनमोल’ बताकर,
शासन अपना लाने को।।
हे राम…

आचार्य अनमोल
दिल्ली

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