Skip to content
गजल- ना कहीं साहित्य का सम्मान है
गजल- उनको आए इक जमाना हो गया
गजल- वो खा गए मलाई
गजल- पक्ष ईमान के कमजोर पड़ रहे यारो
गजल- न आने की कसम खाई
Menu

गजल-
जनता-हितेषियों की, सरकार कैसी आई?
औटाया दूध हमने, वो खा गए मलाई।।

है दूध यूरिया का, घी में मिली है चर्बी,
बीमारी बढ़ रही है, नकली मिले दवाई।

अपनी भलाई करते, दिन-रात व्यस्त दीखे,
मंचों की फूल माला, देती उन्हें बधाई।

खा-खा मलाई-मक्खन, औरों के बन्द ढक्कन,
भाषण से कर रहे हैं, जनता की सेवकाई।

होली हो या दिवाली, नेता न देखे खाली,
वे व्यस्त हैं वहाँ पर, मोटी जहाँ कमाई।

‘अनमोल’ लक्ष्मी के, वाहन हैं आज नेता,
इनको प्रसन्न करके, जी भर करो कमाई।।
🙏🙏
आचार्य अनमोल
‘कैसी आजादी मिली’ से उद्धृत

प्रतिक्रिया दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *