गजल-
धोखे की नैया डूब जाएगी,
सत्य की नौका पार लाएगी।
रच ले कितनी भी साजिशें तू,
बुरी नीयत ही मात खाएगी।
अँधेरी हरकतों से बचोगे तो,
रोशनी आकर मुस्कुराएगी।
मन का दर्पण बुहार ले अपना,
सत्यता साफ नजर आएगी।
छोड़ रोना, भाग्य का अब तो,
मेहनत ही पथ दिखलाएगी।
अच्छा चरित्र धारो, इससे ही,
युग की छवि निखर जाएगी।
बेबसी पर किसी के न हँसो,
यह किसी को भी रुलाएगी।
कड़वा ‘अनमोल’ सत्य होता,
यही कटुता मिठास लाएगी।।
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आचार्य अनमोल
‘अनमोल गजल’ से उद्धृत