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गजल-
व्यस्त होने का बहाना हो गया।
उनको आए इक ज़माना हो गया।।
देख कर उनको अचानक राह में,
दिल हमारा आशिकाना हो गया।
चाँद का दर्शन अचानक यूँ हुआ,
बहुत मुश्किल दिल बचाना हो गया।
हिज्र की पीड़ा सताती ही रही,
दर्द का दिल में ठिकाना हो गया।
आपको हमसे मुहब्बत हो गई,
ये लतीफा अब पुराना हो गया।
याद नेे ‘अनमोल’ दिल का तम हरा,
नाम का दीपक जलाना हो गया।।
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आचार्य अनमोल
दिल्ली
‘कैसी आजादी मिली’ से उद्धृत