Skip to content
गीत-रक्षाबंधन
गजल सत्य की नौका पार लाएगी
गजल- निर्लज्ज राजधानी
गीत- रोते रहना ठीक नहीं
गजल- ना कहीं साहित्य का सम्मान है
Menu

.
🌹🌹🌹
गजल-
व्यस्त होने का बहाना हो गया।
उनको आए इक ज़माना हो गया।।

देख कर उनको अचानक राह में,
दिल हमारा आशिकाना हो गया।

चाँद का दर्शन अचानक यूँ हुआ,
बहुत मुश्किल दिल बचाना हो गया।

हिज्र की पीड़ा सताती ही रही,
दर्द का दिल में ठिकाना हो गया।

आपको हमसे मुहब्बत हो गई,
ये लतीफा अब पुराना हो गया।

याद नेे ‘अनमोल’ दिल का तम हरा,
नाम का दीपक जलाना हो गया।।
💥
आचार्य अनमोल
दिल्ली
‘कैसी आजादी मिली’ से उद्धृत

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x