घर घर बने अखाड़े हैं
वीरों ने ही अपने दम पर,
रिपु के पैर उखाड़े हैं,
लेकर के तलवार हाथ में,
उन पर सदा दहाड़े हैं।।
कितने ही आतंकी आए,
सबने जोर दिखाया है।
भारत आए चोर-लुटेरे
लूट-लूट धन खाया है।
कितनों का हम नाम बताएँ,
भूले सभी पहाड़े हैं।।
वीरों…
अंग्रेजों ने किया बहाना,
भारत में वे घुस आए।
लालच उनके मन में आया,
स्वर्ग-संपदा-सुख पाए।
बदल गया है भारत अब तो,
घर-घर बने अखाड़े हैं।।
वीरों…
कुछ हैं देश विरोधी नर तो,
कुछ आतंक समर्थक हैं।
कुछ ने राष्ट्रभक्ति है त्यागी,
कुछ दुर्भाव प्रवर्तक हैं।
जयचंदों के अब भी देखे,
बजते मिले नगाड़े हैं।।
वीरों…
विश्व हमारी ओर ताकता,
हमने विद्या पाई है।
समरसता ने ऊँच-नीच की,
मेटी सारी खाई है।
गजनी, गौरी यवन लुटेरे,
हमने बहुत पछाड़े हैं।।
वीरों…
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आचार्य अनमोल
दिल्ली
मो० 9968014568