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गजल सत्य की नौका पार लाएगी
गजल- निर्लज्ज राजधानी
गीत- रोते रहना ठीक नहीं
गजल- ना कहीं साहित्य का सम्मान है
गजल- उनको आए इक जमाना हो गया
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चुप-चुप रोना छोड़ दिया

आज तुम्हें बतलाऊँ मन की,
चुप-चुप रोना छोड़ दिया।।

जब से माँ है स्वर्ग सिधारी,
तब से मैं बन गया पुजारी।
उसकी ममता याद करूँ मैं,
सब बातों को ध्यान धरूँ मैं।
उसकी प्यार भरी गोदी का,
सुखद बिछौना छोड़ दिया।।
आज…

जीवन में सुख-दुख आते हैं,
ये सब को ही भरमाते हैं।
जग-सच्चाई जो भी जाने,
वह मानव खुद को पहचाने।
मन को नित समझाकर मैंने,
दुख का ढोना छोड़ दिया।।
आज…

मीत भाव को मैंने पाया,
मैं मन में अतिशय हर्षाया।
जीवन में क्या लेकर आया,
यह धोखे का है सरमाया।
विष का बीज कभी न फैले,
उसको बोना छोड़ दिया।।
आज…

मुझे समय ने यही बताया,
जो सोया है वह पछताया।
सुख-वैभव घर में आएगा,
हर्ष भाव मन में छाएगा।
जब से मेहनत को है जाना,
जादू टोना छोड़ दिया।।
आज…

झोलेभर दौलत को पाकर,
कभी न रहना मन इतराकर।
जितने वैभव आए घर में,
लालच भागेगा दर-दर में।
ख्वाब न पूरे हुए कभी भी,
दुख में सोना छोड़ दिया।।
आज…
🌹🌹
आचार्य अनमोल
दिल्ली
मो० 9968014568

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