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गीत-रक्षाबंधन
गजल सत्य की नौका पार लाएगी
गजल- निर्लज्ज राजधानी
गीत- रोते रहना ठीक नहीं
गजल- ना कहीं साहित्य का सम्मान है
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गीत
जीवन का हर गान छंद है
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जीवन का हर गान छंद है,
जगती में धनवान छंद है।
किसी तरह भी इसको देखो,
घर के बाहर मान छंद है।
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मन अंदर अभिमान छंद है,
प्यासे को नित पान छंद है।
गुणी जनों के अंदर देखो,
भरी गुणों की खान छंद है।
🌹
मधुर शब्द को कान छंद है,
राग-रागिनी तान छंद है।
विद्या वाला दान छंद है,
रसिक जनों को पान छंद है।
🌹
प्यार भाव सम्मान छंद है,
जीवन में पहचान छंद है।
हैं अनमोल रूप सब सारे,
काव्य रूप में ज्ञान छंद है।।
🌷🌷
आचार्य अनमोल
दिल्ली
मो० 9968014568

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