श्रमिक-साधना तेरी जय हो श्रमिक-साधना, सदा हृदय से गाऊँ मैं। अग्रदूत तू है ईश्वर का, तेरे गुण बतलाऊँ मैं।। राष्ट्रभक्ति के गुण को पाकर, किया नित्य अभिनव उपकार। नव निर्माण सृजनकर जग में, तूने चाँद लगाए चार। कष्ट भुलाए कर्म क्षेत्र के, ये कैसे बिसराऊँ मैं।। तेरी… सेवा कर्म सदा अपना के, जन-सेवक कहलाते हो। […]
टूट रहे संबंध भूल रहे हम अपनेपन का, घर वाला अनुबंध, स्वारथ में हम भरे हुए हैं, टूट रहे सम्बंध।। आपाधापी के कारण ही, छूट रहे सब काम। धन के मद में लगा हुआ है, मन में पूर्ण विराम। प्रेम भाव में सबके देखा, आपस में प्रतिबंध।। भूल… जीवन की बगिया में हम ही, लिखते […]
समर्पित (यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवताः) उन सभी व्यक्तियों को जो पुत्र और कन्या मेंभेद नहीं करते। भूमिका कन्या के महत्त्व को बताने वाली आचार्य अनमोल द्वारा लिखित काव्य-कृति ‘भ्रूण हत्या और कन्या की पुकार’ की पांडुलिपि जब मैंने पढ़ी तो मेरा मन अजन्मा कन्या की हृदय-विदारक पुकार सुनकर गदगद हो गया, कंठ अवरुद्ध […]