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गीत-रक्षाबंधन
गजल सत्य की नौका पार लाएगी
गजल- निर्लज्ज राजधानी
गीत- रोते रहना ठीक नहीं
गजल- ना कहीं साहित्य का सम्मान है
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गजल-
आ गया सारा जमाना, दिल दुखाने के लिए
एक भी आया न बंदा, दुख मनाने के लिए।

रूह से हमने जिसे अति, प्यार दिल से था दिया,
शख़्स वह लाया नमक, हमको रुलाने के लिए।

जानकर अब सत्यता को, मोह धन से हट गया,
दे दिया सारा खजाना, बस लुटाने के लिए।

आजकल के लोग इतने, स्वार्थ में हैं भर गए,
पालते हैं नाग वे, सबको सताने के लिए।

इस धरा पर कौन जन, अमरत्व सुख को पा गया,
मिल गए ‘अनमोल’ जन, जग को बताने के लिए।
🙏🙏
आचार्य अनमोल
‘देश अब आजाद है’ इसे उद्धृत